नए इंजीनियर्स नया नज़रिया- श्रेयोवशी का फ्रूगल लैब्स

 

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"बिना परिवर्तन, प्रगति नामुमकिन है; आप अपनी सोच में बदलाव लाए बगैर परिवर्तन को अंजाम नही दे सकते।" मशहूर लेखक जार्ज बनार्ड शाॅ के उपयुक्त कथन श्रेयोवशी सिन्हा पर बिलकुल सही बैठते हैं। श्रेयोवशी सिन्हा ने भूगोल से अपना कैरियर शुरू किया लेकिन बाद में अपनी लीक बदल ली। अभी वह फ्रूगल लैब्स की सह-संस्थापक और मार्केटिग निदेशक हैं। यह एक नई कंपनी है जो प्रशिक्षण, कार्यशाला, परियोजना तथा प्रारूप(प्रोटोटाइप) निर्माण जैसी सेवाएं मुहैया करती है।

श्रेयोवशी का जन्म कोलकाता में हुआ था। वह एक मेधावी छात्रा थीं। एक व्यवसायी पिता की पुत्री होने के नाते, व्यवसाय में कदम रखने के उनके पास हर वक्त विकल्प मौजूद थे। भूगोल की पृष्ठभूमि से जुड़ी श्रेयोवशी ने पहली नौकरी एक एचआर कंसल्टेन्सी फर्म में की। हालांकि शीघ्र ही, वह एक इंश्योरेन्स कंपनी के एचआर एक्जक्यूटिव पद पर चेन्नई चली गईं। लेकिन यह नौकरी भी उन्हें रास नही आई। कुछ माह बाद, वह एक दोस्त द्वारा चेन्नई में स्थापित नई कंपनी रोबोटिक्स से जुड़ गईं। उन्हें रोबोटिक्स का कोई ज्ञान नही था, पर उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और इसमें रुचि लेना शुरू किया। कई उतार-चढ़ावों से गुजरने के बाद यह कंपनी बंद हो गई। यहां उनकी जिंदगी में अचानक एक नया मोड़ आया। श्रेयोवशी और उनके दोस्त अनिर्बन चौधरी( फ्रूगल लैब्स के सह-संस्थापक और टेक्निकल हेड) ने भारत के टेक हब- बैंगलोर जाने का फैसला किया।

श्रेयोवशी बताती हैं कि शुरू में यह बहुत कठिन था, पर दोस्तों और परिवार की मदद से नवम्बर 2012 में फ्रूगल लैब्स प्रारंभ किया गया। उनके ही शब्दों में "जहां ज्यादातर कंपनियां उत्पाद निर्माण के पीछे भागती रहती हैं, हम फ्रूगल लैब्स में प्रशिक्षण माॅड्यूल विकसित करते हैं। ये माॅड्यूल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कुछ नया करने का जज्बा रखनेवालों को अच्छा मौका दे सकते हैं।"

प्रौद्योगिकी आधारित इस प्रशिक्षण माॅड्यूल को काफी सरल बनाया गया है ताकि हर कोई समझ सके। साथ ही, फ्रूगल लैब्स उत्पाद कंपनियों को प्रारूप और परियोजना बनाने में मदद करता है और दुनियाभर के ग्राहकों को अपनी सेवाएं प्रदान करता है। कंपनी ने काॅलेज के छात्रों के प्रशिक्षण के लिए आइओटी (इंटरनेट आॅफ थिंग) इंटरप्रेन्योर चैलेंज 2015 नामक एक माॅड्यूल बनाया है। इसका उद्देश्य है नवीनतम प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नई पीढ़ी के छा़त्रों के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देना। प्रारंभ में कंपनी अपना खर्चा खुद जुटाती थी, लेकिन अभी कार्यशाला एवं परियोजना के जरिए आमदनी हो रही है। वर्तमान में कंपनी मुख्यतः भारत में काॅलेज छात्रों को अपनी सेवाएं दे रही हैं। श्रेयोवशी कहती हैं, "भारत में लगभग 4000 इंजीनियरिंग काॅलेज है और इनमें 700 आंध्रप्रदेश में है। भारत में सालाना करीब 450 नई प्रौद्योगिकी कंपनी बाजार में आती हैं जबकि अमेरिका में यह संख्या 25000 है। हमारा मानना है कि भारतीय छात्र अत्यंत प्रतिभावान होते हैं, पर उनमें नए नजरिए की कमी है। हम ठीक इसी अंतराल को पाटना और इस प्रकार ’मेक इन इंडिया’ की अवधारणा को साकार करना चाहते हैं।"

एक महिला उद्यमी की अंतर्यात्रा की परतों को खोलते हुए श्रेयोवशी बताती हैं- "मैं इस सेक्टर में खुश हूं क्योंकि मेरे लिए किसी एक विषय से चिपके रहना कठिन है। परिवर्तन से ही जीवन में नई चीजें सीखने को मिलती है।" उनके मुताबिक भारत में महिलाओं के बीच उद्यमशीलता बढ़ रही है। प्रत्येक आदमी का अपना व्यक्तित्व होता है। यदि और भी महिलाएं इस क्षेत्र में आती हैं तो समाज में बेहतरी आएगी।

चुनौती तथा भविष्य की योजना के बारे में श्रेयोवशी कहती हैं कि उद्यमी होने का ही दूसरा नाम चुनौती है, ’’यों तो व्यवसाय में हर निर्णय चुनौती भरा होता है, मगर असल रोमांच इन चुनौतियों पर फतह हासिल करने में है।’’ एक समय में एक ही काम में लगे रहना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। वह फ्रूगल लैब्स को भारत की सबसे बड़ी शैक्षिक प्रौद्योगिकी कंपनी बनाना चाहती हैं। उनकी चाहत है कि वह विभिन्न परियोजनाओं में शामिल हों और भारत के पिछड़े गांवों में सामुदायिक विकास का काम करें। मगर उनकी यात्रा यही खत्म नही हो जाती। वह एक नई परियोजना जो अभी बिल्कुल प्रारंभिक चरण में है, पर काम कर रही हैं। इसमें आम आदमी के लिए यात्रा को आसान बनाने पर जोर है। आखिर में श्रेयोवशी कहती हैं- ’’मेरा मन बहुत चंचल है, मैं हमेशा कुछ नया सोचती हूं। मैं एक ब्लाॅगर भी हूं। मुझे यात्रा में आनंद आता है और पहाड़ काफी पसंद हैं।’’