कई ई-वॉलेट डाउनलोड करने का झंझट खत्म, जल्द मिलेगी एटीएम जैसी सुविधा 

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डिजिटल इकॉनमी का प्रमुख हिस्सा बन चुके इन वॉलेट पर निगरानी रखने वाले रिजर्व बैंक ने सिर्फ 6 महीने के अंदर नई नीति बनाने का फैसला किया है। RBI के इस नियम से डिजिटल इकॉनमी को बढ़ावा मिलेगा और उसमें तेजी आएगी। 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
 पहले इन वॉलेट से ट्रांजैक्शन की लिमिट थी, लेकिन बाद में आरबीआई ने लोगों की जरूरत का ध्यान रखते हुए इस लिमिट बढ़ा दिया था। इस सीमा को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया गया है। 

पेटीएम जैसी कंपनी के वॉलेट से छोटी खरीदारी (10 हजार तक) में रकम ट्रांसफर के लिए किसी केवाईसी की जरूरत नहीं होती है। 20 हजार से ऊपर की खरीदारी के लिए केवाईसी भरना पड़ता है।

डिजिटल इंडिया के जमाने में जेब के पर्स में पैसे रखकर चलने वाला जमाना तो जाने को है। लोग अपने स्मार्टफोन में ही ई-वॉलेट डाउनलोड करते हैं और उसमें अपने बैंक खाते से सीधे पैसे डालकर जरूरत के मुताबिक खर्च करते हैं। लेकिन मार्केट में इतने सारे डिजिटल ई-वॉलेट आ गए हैं कि लोग असमंजस में पड़ जाते हैं कि कौन सा वॉलेट डाउनलोड करें कि उनके सारे काम हो जाएं। कई सारे लोग तो अपने फोन में दो-तीन वॉलेट रख लेते हैं। लेकिन एक मुश्किल हमेशा बनी रहती है और वह यह कि एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में पैसे कैसे ट्रांसफर किए जाएं। लेकिन इस मुश्किल को रिजर्व बैंक हल करने जा रहा है।

डिजिटल इकॉनमी का प्रमुख हिस्सा बन चुके इन वॉलेट पर निगरानी रखने वाले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सिर्फ 6 महीने के अंदर नई नीति बनाने का फैसला किया है। RBI के इस नियम से डिजिटल इकॉनमी को बढ़ावा मिलेगा और उसमें तेजी आएगी। ऐसा होने के बाद फिर आप जल्दी ही एक ई-वॉलेट से दूसरे वॉलेट में पैसे भेज सकेंगे। इससे कैशलेस पेमेंट्स को बढ़ावा दिया जा सकेगा और एक ई-वॉलिट होने पर ही ट्रांजैक्शन की बंदिश को भी खत्म किया जा सकेगा। हालांकि केंद्रीय बैंक ने यह सुविधा उन यूजर्स के लिए ही शुरू करने का फैसला लिया है, जिनकी केवाआईसी पूरी होगा। ई-वॉलेट यूज करने वाले लोगों में ऐसे लोगों की संख्या बहुत ही कम है, जिनकी केवाईसी (नो योर कस्टमर) पूरी है।

ये ई-वॉलेट अब हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं और रोजमर्रा की जरूरतों के पूरी करने के लिए लोग इसका इस्तेमाल भी करने लग गए है। पहले इन वॉलेट से ट्रांजैक्शन की लिमिट थी, लेकिन बाद में आरबीआई ने लोगों की जरूरत का ध्यान रखते हुए इस लिमिट बढ़ा दिया था। इस सीमा को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं दुकानदार हर महीने बैंक अकाउंट में 50,000 रुपये तक ट्रांसफर कर सकते हैं। वॉलेट कंपनियां अपने ग्राहकों से केवाईसी कराने के लिए कहती हैं। केवाईसी से ग्राहक कंपनी के पहचान में आ जाता है और फिर वह ज्यादा ट्रांजैक्शन करने में भी समर्थ हो जाता है। पेटीएम जैसी कंपनी के वॉलेट से छोटी खरीदारी (10 हजार तक) में रकम ट्रांसफर के लिए किसी केवाईसी की जरूरत नहीं होती है। 20 हजार से ऊपर की खरीदारी के लिए केवाईसी भरना पड़ता है।

एक कंपनी से दूसरे कंपनी के वॉलेट में पैसे भेजने के संबंध में आरबीआई ने इसी साल मार्च में एक ड्राफ्ट तैयार किया था और आम लोगों से इसे लेकर सुझाव मांगे थे। बताया जा रहा है कि 11 अक्टूबर को आरबीआई एक बार फिर से इस संबंध में आदेश जारी कर सकता है। आरबीआई ने यह प्रयास ऐसे समय में शुरू किया है, जबकि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस का भी प्रयास तेजी से चल रहा है। यूपीआई के तहत आपको किसी एक ई-वॉलेट में पैसे रखने की जरूरत नहीं होगी और आप सीधे बैंक खाते से ही आसानी से रकम ट्रांसफर सकेंगे।

अब तक पेटीएम, फ्रीचार्ज और मोबिक्विक जैसे मुख्य ई-वॉलेट्स प्रचलन में हैं, जो क्लोज्ड लूप स्ट्रक्चर के तहत ही काम करते हैं और अपने ही नेटवर्क पर रकम का ट्रासफर स्वीकार करते हैं। बीते साल नवंबर में नोटबंदी के बाद से डिजिटल पेमेंट में खासा उछाल आया था और उसी दौरान पेटीएम और मोबिक्विक जैसे ई-वॉलेट्स का इस्तेमाल करने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई थी। यही नहीं नेट बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में भी काफी बढ़ोत्तरी हुई थी। फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों ने भी अपने वॉलेट उतार दिए हैं। इसका मुकाबला बाज़ार में मौजूद अलीबाबा के पेटीएम और फ्रीचार्ज से है।

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