भारत की इन दो गौरवशाली इमारतों को मिला यूनेस्को का एशिया पैसिफिक अवॉर्ड

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यूनेस्को ने जम्मू कश्मीर स्थित लामो सेंटर को अवॉर्ड ऑफ डिस्टिंक्शन श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। वहीं मुंबई में यूनिवर्सिटी क्लॉक टावर और एक फव्वारे के मरम्मत कार्य को चीन की एक परियोजना के साथ संयुक्त तौर पर ऑनरेबल मेन्शन मिला है।

मुंबई का क्लॉक टावर और लामो सेंटर
मुंबई का क्लॉक टावर और लामो सेंटर
 पुरस्कार का उद्देश्य दूसरे संपत्ति मालिकों को अपने समुदायों के भीतर स्वतंत्र रूप से या सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तलाश करके संरक्षण परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। 

यूनेस्को ने भारत की दो इमारतों के मरम्मत कार्य के संरक्षण को एशिया पैसिफिक अवॉर्ड से नवाजा है। पहली इमारत लद्दाख की है वहीं दूसरी इमारत मुंबई विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी की है। यूनेस्को ने जम्मू कश्मीर स्थित लामो सेंटर को अवॉर्ड ऑफ डिस्टिंक्शन श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। वहीं मुंबई में यूनिवर्सिटी क्लॉक टावर और एक फव्वारे के मरम्मत कार्य को चीन की एक परियोजना के साथ संयुक्त तौर पर ऑनरेबल मेन्शन मिला है। लद्दाख में स्थित लामो सेंटर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था जिसकी मरम्मत की जा रही है।

यूनेस्को के निर्णायक मंडल द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, 'लामो सेंटर में किया जाने वाला कार्य यहां के निवासियों और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करेगा।' पुराने लेह शहर स्थित यह ऐतिहासिक इमारत 17वीं शताब्दी की है। यहां पहले तोगोचे (मुंशी) परिवार रहा करता था जो कि यहां के राजा हुआ करते थे। अब इस इमारत को लद्दाख आर्ट्स ऐंड मीडिया ऑर्गनाइजेशन (LAMO) द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। इससे अब लेह और लद्दाख के लोगों के लिए यहां एक आर्ट्स् सेंटर बनाया जाएगा। यह जगह 17वीं शताब्दी में व्यापारियों के लिए एक विनिमय केंद्र हुआ करती थी।

वहीं मुंबई यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित राजाबाई क्लॉक टावर और रूटन्सी मुलजी जेठा फव्वारे औपनिवेशक युग से संबंध रखते हैं। नामी संरक्षण वास्तुकार विकास दिलावरी इसकी देखरेख और मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्हें उनके पहले के कामों के लिए यूनेस्को द्वारा विरासत संरक्षण पुरस्कार भी मिल चुका है। दिलावरी ने कहा, 'यह एक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर आधारित परियोजना थी जिसमें ग्रेटर मुंबई नगर निगम, काला घोड़ा अथॉरिटी ने साथ मिलकर काम किया।'

सांस्कृतिक विरासत संरक्षण कार्यक्रम के लिए यूनेस्को का एशिया पैसिफिक पुरस्कार निजी व्यक्तियों और संगठनों के प्रयासों को मान्यता देता है जिन्होंने इस क्षेत्र में हेरिटेज अहमियत रखने वाली संरचनाओं या भवनों को सफलतापूर्वक संरक्षित किया है। पुरस्कार का उद्देश्य दूसरे संपत्ति मालिकों को अपने समुदायों के भीतर स्वतंत्र रूप से या सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तलाश करके संरक्षण परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। पुरस्कृत परियोजनाएं विभिन्न मानदंडों की स्पष्ट समझ और आवेदन को दर्शाती हैं जिनमें स्थान की समझ, तकनीकी उपलब्धि, और परियोजना के सामाजिक और नीति प्रभाव शामिल होते हैं।

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