पति के ज़ुल्म और जिस्मफ़रोशी के दलदल से निकल, सेक्स वर्कर्स को आत्मनिर्भर बना रही यह महिला

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जयम्मा भंडारी, चैतन्य महिला मंडली (सीएमएम) नाम से एक संस्था चलाती हैं, जो सेक्स वर्कर्स को इस दलदल से निकाल उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम करती है। आंध्र प्रदेश के नलगोंडा की रहने वाली जयम्मा सेक्स वर्कर्स के लिए मसीहा हैं।

जयम्मा भंडारी ने अपनी सोच को एक मुहिम का स्वरूप दे दिया है। अपनी संस्था के माध्यम से अभी तक वह 5,000 से ज़्यादा महिलाओं और 3,500 से ज़्यादा बच्चों की बदहाल ज़िंदगी का स्वरूप बदल चुकी हैं।

आज हम जो कहानी आपके साथ साझा करने जा रहे हैं, वह महिलाओं को सिर्फ़ एक शरीर या सामान के तौर पर देखने वालों लोगों के लिए सबक है। यह कहानी उन लोगों के लिए सीख भी है और चेतावनी भी, जो महिलाओं को कमज़ोर या बेबस समझते हैं और जिन्हें लगता है कि वे महिलाओं के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार कर सकते हैं। यह कहानी है, आंध्र प्रदेश के नलगोंडा की रहने वालीं, जयम्मा भंडारी की, जो सेक्स वर्कर्स के लिए मसीहा बनीं। जयम्मा भंडारी, चैतन्य महिला मंडली (सीएमएम) नाम से एक संस्था चलाती हैं, जो सेक्स वर्कर्स को इस दलदल से निकालकर, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम करती है।

सेक्स वर्कस को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम

चैतन्य महिला मंडली सेक्स वर्कर्स के कौशल विकास का काम करती है, ताकि वे आत्मनिर्भर हो सकें और पैसे की या अन्य ज़रूरतों के लिए उन्हें किसी पर निर्भर न रहना पड़े। जयम्मा भंडारी ने अपनी सोच को एक मुहिम का स्वरूप दे दिया है। अपनी संस्था के माध्यम से अभी तक वह 5,000 से ज़्यादा महिलाओं और 3,500 से ज़्यादा बच्चों की बदहाल ज़िंदगी का स्वरूप बदल चुकी हैं।

ख़ुद पर हुए ज़ुल्म को ही बनाया हथियार

सेक्स वर्कर्स की ज़रूरतों और मनोवैज्ञानिक तौर पर उनको संबल देने के महत्व को जयम्मा भंडारी बहुत अच्छे से समझती हैं क्योंकि वह ख़ुद भी इस दौर से गुज़र चुकी हैं। जयम्मा महज़ 3 साल की उम्र में ही अनाथ हो गई थीं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद उन्हें रिश्तेदारों के साथ रहना पड़ा। रिश्तेदार जयम्मा को बोझ समझते थे और उनसे जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते थे और इसलिए ही रिश्तेदारों ने मौक़ा मिलते ही जयम्मा की शादी करवा दी। शादी के बाद जयम्मा के लिए हालात बद से बदतर हो गए। उनका पति पैसे के लालच में उनका मानसिक और शारीरिक शोषण करने लगा। हर तरह का दबाव बनाने के बाद भी जब उनके पति को कुछ हासिल न हुआ तो उसने जयम्मा को जिस्मफ़रोशी के धंधे में झोंक दिया। ज़िंदगी से ज़ुल्म के सिवाय जयम्मा को कुछ भी हासिल नहीं हुआ, लेकिन उनका हौंसला कभी नहीं टूटा। अपने पुराने और दर्दभरे दिनों को याद करते हुए जयम्मा बताती हैं कि उन्होंने कई बार अपनी जान लेने की कोशिश की, लेकिन जवान बेटी के ख़्याल ने उन्हें हमेशा रोक लिया। बेटी के अच्छे भविष्य को सुनिश्चित करने की ज़िद ने ही जयम्मा के अंदर बेशुमार हिम्मत भरी।

जयम्मा बताती हैं कि इस दौर में ही एक दिन इत्तिफ़ाक़न, उनकी मुलाक़ात जय सिंह थॉमस से हुई, जो एक एनजीओ के साथ काम कर रहे थे। जय सिंह ने एक कार्यक्रम में मुलाक़ात के दौरान ही जयम्मा के अंदर छिपी एक सशक्त और क्रांतिकारी महिला को पहचान लिया था। उन्होंने जयम्मा को सलाह दी कि वह सेक्स वर्कर्स के स्किल डिवेलपमेंट पर काम करें और उन्हें अपने पैरों पर खड़े होना सिखाएं। जय सिंह ने ही उन्हें को-ऑर्डिनेटर की नौकरी का ऑफ़र दिया और जयम्मा नौकरी करने लगीं। 2001 में जयम्मा ने अपनी नौकरी छोड़ी और आंध्र प्रदेश में चैतन्य महिला मंडली की स्थापना की। न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में जयम्मा ने विस्तार से बताया कि किस तरह उन्होंने सेक्स वर्कर्स को सिखाया कि वे अपनी पिछली ज़िंदगी के सदमे से निकलकर, नई शुरूआत कर सकती हैं और अपना भविष्य बेहतर बना सकती हैं।

चैतन्य महिला मंडली जोख़िम के दायरों में जी रहे समुदायों (झुग्गी-झोपड़ियों आदि में रहने वाली आबादी) के बीच जागरूकता फैलाने का काम करती है। मंडली, ग़रीब लोगों को और ख़ासकर महिलाओं को उनके सेक्स संबंधी अधिकारों और सेक्स से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानकारी देते हैं। साथ ही, संस्था कौशल विकास का प्रशिक्षण भी देती है, ताकि निर्भर महिलाएं, अपनी आजीविका चलाने का ज़रिया ख़ुद खोज सकें। जयम्मा भंडारी को जानने वाले लोग, उन्हें प्यार और सम्मान से ‘अम्मा’ कहकर बुलाते हैं। इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौक पर उन्हें राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इंडिया विमिन ब्लॉग के मुताबिक़, जयम्मा को 2017 में एक्ज़ेम्प्लर अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया था।

नशे की शिकार महिलाओं को समझाना चुनौतीपूर्ण

जयम्मा कहती हैं कि सेक्स वर्कर्स को नई शुरूआत के लिए राज़ी करना बेहद मुश्किल काम होता है, क्योंकि इनमें से कई महिलाएं ऐसी होती हैं, जो नशे या सेक्स की आदी हो जाती। इन सेक्स वर्कर्स के ज़हन में कई तरह के सवाल होते हैं; जैसे कि क्या दूसरे कामों से वह ख़ुद को और अपने बच्चों को पाल सकेंगी? कहीं उनकी स्थिति मौजूदा हालात से भी बदतर तो नहीं हो जाएगी? जयम्मा कहती हैं कि ऐसे सवालों के संतोषजनक जवाब देना और अपने वादों पर खरा उतरना, एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम है।

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