प्लेबॉय के संस्थापक ह्यू हेफनर का कभी दिल टूटा था, अब सांसें टूटीं

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एक वक्त ऐसा था कि प्लेबॉय मैगजीन खत्म होने की कगार पर पहुंच गई थी लेकिन हेफनर ने हार नहीं मानी, वह मृत्युपूर्व तक प्लेबॉय को 43 मिलियन डॉलर की कंपनी के रूप में छोड़ गए।

प्लेबॉय के संस्थापक हेफनर
प्लेबॉय के संस्थापक हेफनर
एक वक्त में उनका तीसरी शादी का सपना टूट गया था, जब उनकी मंगेतर और प्लेमेट ने शादी से ठीक पहले अलग होने का फैसला किया था। उस वक्त 85 वर्ष के थे हेफनर और क्रिस्टल हैरिस मात्र 25 साल की। 

हेफनर ने 1953 में प्लेबॉय पत्रिका की स्थापना की थी। सेक्स के नाम पर हेफनर ने एक दौर में बड़ी लड़ाई लड़ी। पहनावों की तारीफ करना और लड़कियों से घिरा रहना उनका विवादित शौक था। 

अपनी मैगजीन 'प्ले बॉय' से पूरे एक युग को अपनी रंगीनियों से सराबोर करने वाले 91 वर्षीय ह्यू हेफनर अब इस दुनिया में नहीं रहे। बार-बार शादियां रचाने से उनका दिल टूटता रहा, अब उनकी सांसों के तार भी टूट गए। वह अपने पीछे अपयश की एक लहर सी छोड़ गए। ह्यूज अपनी अनोखी लाइफस्टाइल से हमेशा सुर्खियों में बने रहे। उनका जन्म 9 अप्रैल, 1926 को शिकागो में हुआ था। वह एक पॉलिटिकल एक्टिविस्ट भी थे। 1953 में आई प्लेबॉय मैगजीन के बाद वह एकाएक सुर्खियों में आ गए। तब तक वह एक सेलिब्रिटी बन चुके थे। धीरे-धीरे उनका दायरा इस कदर बढ़ता गया कि लोग उनसे मिलने के लिए बेताब होने लगे। उनके घर के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहती थीं। ह्यूज का अक्सर विवादों से नाता रहा। उनके ऊपर लड़कियों से अत्याचार के संगीन आरोप लगे। एक वक्त ऐसा था कि प्लेबॉय मैगजीन खत्म होने के कगार पर पहुंच गई थी लेकिन हेफनर ने हार नहीं मानी, वह मृत्युपूर्व तक प्लेबॉय को 43 मिलियन डॉलर की कंपनी के रूप में छोड़ गए।

ह्यूज के जीवन से जितनी रंगीनियां, उतना ही संघर्षों का नाता रहा। एक वक्त में उनका तीसरी शादी का सपना टूट गया था, जब उनकी मंगेतर और प्लेमेट ने शादी से ठीक पहले अलग होने का फैसला किया था। उस वक्त 85 वर्ष के थे हेफनर और क्रिस्टल हैरिस मात्र 25 साल की। टीवी पर शादी के दो घंटे का वीडियो भी प्रसारित होना था। इस खास मौके को यादगार बनाने के लिए 300 मेहमानों को न्यौता भेजा गया था। शादी लॉस एंजलिस स्थित हेफनर की हवेली में होनी थी। शादी टूट जाने पर उस दिन ट्विटर पर हेफनर ने लिखा था- शादी रद्द हो गई है। हैरिस का मन बदल गया है। रिश्ता टूट जाने से दिल टूट गया है। खैर यह अच्छा है कि शादी से पहले हुआ है ना कि शादी के बाद। हैरिस हवेली से निकलते समय उनका पालतू कुत्ता चार्ली भी साथ ले गई। इससे पहले वर्ष 2008 में एक हैलोवीन पार्टी में हैरिस और हेफनर की मुलाकात हुई थी। कुछ ही हफ्तों के बाद वह हेफनर के साथ रहने उनकी हवेली चली गई और दिसंबर 2009 में प्लेमेट ऑफ द मंथ चुनीं गईं। हेफनर ने क्रिसमस पर क्रिस्टल को सगाई की अंगूठी दी थी।

हेफनर ने 1953 में प्लेबॉय पत्रिका की स्थापना की थी। सेक्स के नाम पर हेफनर ने एक दौर में बड़ी लड़ाई लड़ी। पहनावों की तारीफ करना और लड़कियों से घिरा रहना उनका विवादित शौक था। वह चार बच्चों के पिता थे। पश्चिमी देशों में 1950 और उसके पहले के दशकों में स्त्री देह से जुड़ी धारणाओं को तोड़ उसे आनंद पाने की एक सामान्य चीज बनाने में हेफनर का दुस्साहसिक हाथ रहा। हेफनर और पूर्व प्लेमेट किमबर्ली कोनराड की दूसरी शादी भी टूट गई थी। उनकी पहली शादी मिल्ड्रेड विलियम्स से हुई थी जो कि 1959 में खत्म हो गई थी। दोनों ही बीवियों से हेफनर को दो-दो बच्चे रहे। उनका सारा काम उनकी सबसे बड़ी बेटी क्रिस्टी हेफनर संभालती हैं। हेफनर की पहली शादी दस साल चली और दूसरी बीस साल। शायद इस बार उनका सपना तीस साल तक के साथ का था, जो तीन ही सालों में बगैर शादी के बंधन के छिन्न-भिन्न हो गया। शादी से पहले प्लेबॉय में हैरिस की तस्वीर कवर पेज पर प्रकाशित होनी थी, जो छपने से रह गई थी।

अमेरिकी मैग्जीन प्लेबॉय के पब्लिशर, एडिटर और बिजनेस मैन हेफनर के बारे में सबसे ज्यादा दुर्गंध देने वाली सूचना करोड़ों लोगों तक पहुंच चुकी थी कि उसके पांच हजार से ज्यादा स्त्रियों से संबंध रहे। उनका प्लेबॉय मैन्शन भी काफी चर्चा में रहा। पहली बार तुर्क मूल की किसी जर्मन महिला को प्लेबॉय के कवर पर जगह मिली। सिला साहिन नाम की यह महिला तस्वीरों को क्रांतिकारी और बाकी लड़कियों के लिए सीख लेने वाला मानती थी। तुर्क उससे बेहद नाराज हो उठे थे। उस वक्त प्लेबॉय को दिए एक इंटरव्यू में सिला ने कहा था कि मुझे चे ग्वेरा जैसा महसूस हो रहा है। 

तुर्क समुदाय को जर्मनी में पिछड़ा और रूढ़िवादी माना जाता है। उन्हें हिजाब से जोड़ कर देखा जाता है। वहीं तुर्क जर्मन लोगों के आधुनिक विचारों को अनैतिक मानते हैं। यही वजह है कि कई दशकों से जर्मनी में रहने के बाद भी तुर्क जर्मन समाज का हिस्सा नहीं बन पाए। सिला ने प्लेबॉय का हिस्सा बन कर बाकी तुर्क लड़कियों को एक सीख दी कि वो भी खुद को मुक्त करें। उसने इंटरव्यू में कहा था कि इन तस्वीरों से मैं लड़कियों से यह कहना चाहती हूं कि हमें अपने पर थोपे गए नियमों के अनुसार जीने की कोई जरूरत नहीं है। सालों तक मैंने खुद को दबने दिया और मैं वही करती रही जो दूसरों को लगता था कि मेरे लिए ठीक है लेकिन यह फोटो शूट मेरे लिए मुक्ति देने वाला था।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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