भारतीय स्वाद में आधुनिक भोजन, क्विक सर्विस रेस्तरां फॉर्मेट में 'स्टफ्ड'

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भारत में ठेठ हिन्दुस्तानी, चाइनीज या पिज्जा व्यंजन के अलावा कुछ और अच्छा खाना हो तो सही मायनों में यह आज भी बहुत बड़ी समस्या है. हालांकि लोग वैश्विक हो गए हैं, तरह तरह के व्यंजनों की उपलब्धता अभी भी गायब है. रिद्धिमा विजय कहती हैं, ‘‘मुझे वे दिन याद हैं जब हम शावारमा खाने के लिए पवई से बांद्रा के कार्टर ब्लू जाया करते थे.’’ संतोषजनक शावारमा और पास्ता खोजने के कष्ट ने ही रिद्धिमा और श्रेयांस विजय को क्विक सर्विस रेस्तरां की श्रृंखला स्टफ्ट (Stuffed) की शुरुआत करने के लिए राह दिखाया. इस जोड़ी का लक्ष्य आधुनिक भोजन विकसित करना है जो भारतीय स्वाद में फिट हो जाए और साथ ही साथ जो ताजगी का अनुभव भी कराए. फाइन डाइनिंग को चमकाने के लिए जोड़ी ने QSR फॉर्मेट में विदेशी पास्ता को जोड़ा है. श्रेयांस दावा करते हैं, ‘‘जिस तरह के पास्ता हम यहां परोसते हैं वह किसी भी QSR फॉर्मेट में उपलब्ध नहीं.’’ श्रेयांस आठ सालों तक इनवेस्टमेंट बैंकर के तौर पर काम कर चुके हैं और आईआईटी बॉम्बे से ग्रैजुएट हैं. पत्नी रिद्धिमा सॉफ्टवेयर इंजीनियर और इक्विटी ट्रेडर थीं, दोनों ने इस वेंचर की शुरुआत के लिए अपनी अपनी नौकरी छोड़ दी. श्रेयांस कहते हैं, ‘‘हमने छोटी शुरुआत की लेकिन चार महीनों के भीतर ब्रेक ईवन पर पहुंच गए.”

कंपनी के पास फिलहाल अंधेरी ईस्ट, अंधेरी वेस्ट और पवई में तीन आउटलेट हैं. कंपनी रोजाना 150 ऑर्डर लेती है और जिसका औसतन बिल 250 रुपये के करीब होता है. रिद्धिमा कहती हैं, ‘‘हर महीने हर एक आउटलेट से करीब 10 लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है. हमारे पास दोहराने वाले मजबूत ग्राहकों का अनुपात 60 फीसदी है.’’ जोड़ी का मानना है कि भारतीय, चाइनीज और पिज्जा के अलावा कोई खाना दोपहर या रात के भोजन के रूप में नहीं स्वीकार्य है. श्रेयांस कहते हैं, “हम इस धारणा को बदलने आए हैं. हम अपने शावारमा और पास्ता के लिए जाने जाते हैं. सिर्फ हमारा रेस्तरां ऐसा है जो रेगुलर के साथ साथ बड़े शावारमा परोसता है. पास्ता और सलाद की खुराक भी बहुत अधिक होती है. फाइन डाइनिंग अनुभव के साथ हमारा लक्ष्य अपने आप को QSR रेस्तरां के रूप में स्थापित करना है.” हाल ही में स्टफ्ट ने रिकाएजा कैपिटल से 2.5 करोड़ रुपये फंडिंग ली है और वह अगले 12 महीने में आठ से दस आउटलेट्स खोलना चाह रहा है. कंपनी की योजना प्री पैकेज्ड फूड्स सेगमेंट में भी घुसने की है जिससे वह युवा ग्राहकों तक बड़े भूगोल में पहुंच बना सकेगी. फास्ट फूड चेन जिन्हें QSR भी कहा जाता है, भारत में फूड सर्विस सेक्टर की विकास दर 10 फीसदी के मुकाबले 2015 में 30 फीसदी सीएजीआर की दर से बढ़ेगा. अनुमानित है कि 2017 तक QSR के बाजार का आकार डेढ़ अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर जाएगा.

योरस्टोरी की राय

भारतीय राष्ट्रीय रेस्तरां संघ के मुताबिक अमेरिका (14 बार) और चीन (9 बार) के मुकाबले भारत की 50 फीसदी कम से कम आबादी तीन महीने में एक बार बाहर खाना खाती है. जबकि मेट्रो में आंकड़ा महीने में आठ बार है. QSR सेगमेंट ऐसा है जहां सिर्फ विदेशी कंपनियों का दबदबा है और यहां कोई भी देशी कंपनी नहीं है. बढ़ते उपभोक्तावाद, मजबूत आर्थिक पृष्ठभूमि और बेहतर कमाई भारतीयों को बाहर खाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है जो कि पहले इस तरह से नहीं होता था. इस साल के पहले छह महीने में तकनीक से लैस खाद्य व्यापार ने वेंचर कैपिटलिस्ट का अभूतपूर्व ध्यान अपनी ओर खींचा है. हालांकि ऐसा लगता है कि रूचि कम हो रही है (अगर पिछले तीन महीने को ध्यान से देखें) QSR फॉर्मेट में स्टफ्ट एक मुख्य खिलाड़ी नजर आता है और आने वाले समय में उसके विकास को जानने में रोचक रहेगा.

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