गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए अपना शानदार करियर छोड़ दिया एक CA ने

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दिल्ली विश्वविद्यालय से बी. कॉम और फिर सी.ए. कर चुकीं हैं कुंजन सहगल....

एक अच्छी नौकरी को छोड़कर रखी एनजीओ अधियज्ञ की नीव...

सरिता विहार में गरीब बच्चों को पढ़ाती हैं कुंजल सहगल...


प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हर कोई चाहता है कि वो काफी आगे बढ़े उसके साथी व लोग उसकी सफलता की मिसाल दें। उसका करियर बेहतरीन हो और उसकी जिंदगी में सारी सुख सुविधाएं हों। लेकिन इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ज़िंदगी को बिलकुल दूसरे नज़रिए से देखते हैं। उन्हें एक समय तक अपना करियर दिखता है लेकिन जब उनमें अपने करियर और दूसरे के करियर में तुलना करने की ताकत आ जाती है तो वे बड़ा कदम उठा लेते हैं। और ऐसे में वे एक अच्छे मुकाम पर होकर भी सब कुछ छोड़ देते हैं और अपनी जिंदगी को समर्पित कर देते हैं उन लोगों की जिंदगी सुधारने में जो गरीब है। जिनके बारे में सोचने वाला अमूमन कोई नहीं होता। 

ऐसी ही एक युवा महिला हैं कुंजल सहगल, जो पेशे से चार्टड अकाउंटेंट हैं लेकिन अपनी एक अच्छी नौकरी छोड़कर वे समाज सेवा के क्षेत्र में आईं और गरीब बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने लगीं। कार्य शुरू होने के चंद महीनों में ही उनकी मुहिम रंग भी लाने लगी और 10-12 लड़कियों को पढ़ाने से शुरू हुआ उनका सफर आज काफी आगे पहुंच चुका है।

कुंजल ने हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम ऑनर्स किया उसके बाद उन्होंने सीए किया फिर मुंबई में कोटक महिंन्द्रा बैंक में नौकरी की, लेकिन कुंजल हमेशा से ही सामाजिक कार्यों की तरफ काफी आकर्षित होती थीं वे हमेंशा से ही अपने माध्यम से समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहतीं थी। ग्रेजुएशन के दिनों से ही वे अपने माता पिता से कहा करतीं थीं कि वे नौकरी नहीं करना चाहतीं बल्कि अपने स्तर पर ही गरीब लोगों की मदद करना चाहतीं हैं।

सन 2011 में उन्होंने सी.ए किया और उसके बाद ढ़ाई साल मुंबई में नौकरी भी की। लेकिन नौकरी में उनका मन नहीं लगा वे अब पूरी तरह सामाजिक कार्य ही करना चाहतीं थी और फिर एक दिन उन्होंने तय किया कि अब समय आ गया है जब वे उस काम को करें जिसका सपना वो हमेशा से ही देखती आईं हैं और उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और एक एनजीओ ‘अधियज्ञ’’ की शुरूआत की।

कुंजल बताती हैं कि उनके इस निर्णय में उन्हें उनके परिवार और मित्रों का पूरा साथ मिला और वे हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे।

जनवरी 2015 में कुंजल मे अपना एनजीओ रजिस्टर करवाया और काफी रिसर्च के बाद अप्रेल 2015 में राजस्थानी कैंप, सरिता विहार में गरीब बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाना शुरू किया। रिसर्च के दौरान उन्होंने पाया कि गरीब बच्चे सरकारी स्कूल तो जा रहे थे लेकिन अंग्रेजी में वे बच्चे काफी कमजोर थे जिस कारण वे बाकी प्राइवेट स्कूलों के बच्चों से कॉम्पटीशन में पीछे रह जाते थे। उन बच्चों को अंग्रेजी के बेसिक का भी ज्ञान नहीं था। कुंजल ने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाना शुरू किया। कुंजल बताती हैं कि उन्हें स्थानीय लोगों का भी इस काम में पूरा सहयोग मिला पहले कुछ शरारती बच्चे जो क्लासिज में नहीं आते थे वे बाकी बच्चों को डिस्टर्ब किया करते थे लेकिन वहां के लोगों ने ही उन बच्चों को रोका और क्लासिज को सुचारू रूप से चलने में कुंजल की मदद की। उनकी पहली क्लास में 12 लड़कियां थी लेकिन आज केवल 6 महीनों में ही उनकी क्लास में आने वाले बच्चों की संख्या 90 से ज्यादा हो चुकी है।

अगस्त माह में कुंजल ने सरिता विहार इलाके में एक ईवेंट ऑर्गनाइज किया जिसको इलाके के लोगों ने काफी सराहा और कई लोग उनके एनजीओ से जुड़ गए और अब वे भी बच्चों को पढ़ाते हैं।

कुंजल मानतीं हैं कि शिक्षा पर सबका अधिकार है और यह सरकार का कर्तव्य है कि वो देश के हर बच्चे को मुफ्त में अच्छी शिक्षा मुहैया करवाएं। वे कहती हैं कि शिक्षा ही एक ऐसी चीज है जो किसी का भी जीवन स्तर बदल सकती है, शिक्षा एक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है, उसको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है और उस व्यक्ति से जुड़े सभी लोगों को इससे फायदा पहुंचता है इसलिए सरकार और लोगों को चाहिए कि वे सब देश में शिक्षा के विस्तार के लिए आगे आएं और अपना योगदान दें।

कुंजल बच्चों को पढ़ाती ही नहीं हैं बल्कि वे उनका ओवरऑल डेवलपमेंट भी करना चाहतीं हैं वे विभिन्न इवेंट्स करवाती हैं जिससे बच्चो का कॉन्फीडेंस लेवल बढ़े और वे चीजों को और बारीकी से सीखें।

आज कुंजल के पास नए-नए बच्चे लगातार आ रहे हैं। वहां के बच्चों में अग्रेजी सीखने की जैसे होड़ लग गयी हैं और हर महीने उनके पास आने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है। कुंजल बताती हैं कि अब बच्चों के घर वाले आकर उन्हें बताते हैं कि उनके बच्चे घर में अंग्रेजी में ही बात करने का प्रयास करते हैं जिसको कुंजल एक सकारात्मक बदलाव मानती हैं।

कुंजल बच्चों की ग्रामर, उनकी रीडिंग स्किल और राइटिंग स्किल पर काम करती हैं जिसके काफी अच्छे परिणाम देखने को भी मिल रहे हैं स्कूल में बच्चों के अंग्रेजी में नंबर अब अच्छे आने लगे हैं उनका कॉन्फीडेंस लेवल बड़ रहा है बच्चों के अंदर नयी नयी चीजें सीखने की इच्छा पैदा हो रही है और अब बच्चों को भी शिक्षा का महत्व समझ आने लगा है।

कुंजल और बाकी वॉलंटियर्स बच्चों के साथ काफी फ्रेंडली हैं राजस्थानी कैंप में लगभग हर दिन क्लासिज लगती हैं। यहां दूसरी से लेकर 12वी तक के बच्चे आते हैं।

कुंजल के बेहतरीन काम को देखते हुए कई लोगों ने डोनेशन्स के लिए उन्हें ऑफर किया हैं लेकिन अभी वे किसी भी प्रकार की डोनेशन नहीं लेना चाहतीं वे फिलहाल खुद की ही सेविंग्स से सारा खर्च उठा रहीं हैं। अपने काम से कुंजल काफी संतुष्ट हैं वे बताती हैं कि हर नया दिन उन्हें नयी उर्जा देता है और आने वाले समय में वे कई और प्रयास करेंगी जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों को वे शिक्षित कर पाएं।

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