पेट पूजा के साथ सेहत का रखे ख्याल ‘लिवमोर’

LivMore.in की शुरूआत मार्च, 2013 में हुईगुड़गांव और दक्षिण दिल्ली में 7 ऑउटलेट‘लिवमोर’ की टीम में 18 सदस्य

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भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास सबसे ज्यादा कमी है वक्त की और इसका सीधा असर पड़ता है उनके अनियमित खानपान पर। अव्यवस्थित खानपान के कारण ही लोग पोषक तत्व के बारे में ज्यादा नहीं सोचते और राह चलते फास्टफूड जैसे वडा पांव, समोसा, सैंडविच, चाऊमीन और दूसरी चीजों को खाकर गुजारा करते हैं। इसका खराब असर पड़ता है उनकी सेहत पर और शुरू होता है मोटापे के साथ हर बीमारी का खेल। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अश्वनी भदौरिया ने साल 2013 में लिवमोर डॉट इन की शुरूआत की। जहां पर वो ना सिर्फ खाने में स्वाद का, बल्कि उसके पोषक तत्वों का भी भरपूर ध्यान रखते हैं।

अश्वनी भदौरिया ने ये कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखेंगे। वो तो एक अच्छी खासी नौकरी की तलाश में थे। तभी तो उन्होने पहले टीसीएस में नौकरी की और उसके बाद एमडीआई गुड़गांव से 2 साल का एमबीए किया। एमबीए की पढ़ाई खत्म करने के बाद वो कुछ नया करना चाहते थे इसलिए वो पेरिस चले गये। यहां उन्होने मास्टर्स इन यूरोपियन बिजनेस पर चार महीने का एक कोर्स किया। जिसके बाद स्पेन के मेड्रिड शहर में उनकी नौकरी लग गई। 2 साल तक यूरोप में रहने के बाद उनको लगने लगा कि नौकरी में ज्यादा आजादी नहीं है और वो अपने को ज्यादा बेहतर तरीके से दुनिया के सामने रख सकते हैं। तब उनके मन में स्टार्टअप शुरू करने का विचार आया लेकिन यूरोप के हालात ऐसे नहीं थे कि इस बारे में ज्यादा कुछ सोचा जाए। वहीं दूसरी ओर भारत में स्टार्टअप की काफी संभावनाएं पैदा हो रही थीं। ऐसे में उन्होने भारत लौटने का फैसला लिया। भारत आने के बाद उन्होने पहले एक एनजीओ में काम किया और उसके बाद अपने एक दोस्त में स्टार्टअप में काम करना शुरू किया, लेकिन उनके दोस्त का वो काम परवान नहीं चढ़ पाया तब इन्होने फैसला लिया कि ये खुद कुछ करेंगे। जिसके बाद उन्होने साल 2013 में लिवमोर डॉट इन की नींव रखी।

लिवमोर डॉट इन की शुरूआत के पीछे अश्वनी का कहना है कि उन्होने देखा था कि यूरोप में आम लोग संतुलित आहार के कारण तंदुरस्त रहते हैं, लेकिन भारत में लोग खाने में ज्यादा नमक, मिर्च लेते हैं और न्यूट्रिशन पर ध्यान नहीं देते। साथ ही यहां के खाने में काफी फेट और कैलोरीज होती है। इसी दौरान उनके एक दोस्त को 28 साल की उम्र में हाई ब्लडप्रेशर हो गया था। दोस्त की ये हालत देखकर वो सोचने पर मजबूर हो गये कि क्यों ना इस क्षेत्र में काम किया जाये। अश्वनी का कहना है कि लोग पिज्जा, कोक, पैकेट बंद जूस पीना ज्यादा पसंद करते हैं और उनको कोई ये बताने वाला नहीं होता कि ये सब चीजें गलत हैं। इतना ही नहीं लोगों की लाइफस्टाइल में भी काफी बदलाव आया है। इस कारण लोग अपने खाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते। अश्वनी ने मार्च, 2013 में लिवमोर डॉट इन की शुरूआत गुड़गांव के सेक्टर 14 में एक जिम के पास आउटलेट खोलकर की। इसके पीछे अश्वनी का तर्क है कि लोग जिम में मेहनत करते हैं लेकिन अगर उनको उसी हिसाब से खाना नहीं मिलता तो उनकी मेहनत खराब हो जाती है। धीरे धीरे इनके बनाये खाने की डिमांड बढ़ती गई और आज लिवमोर डॉट इन के गुड़गांव और दक्षिण दिल्ली में कुल मिलाकर 7 आउटलेट काम कर रहे हैं।

लिवमोर डॉट इन के दूसरे सह-संस्थापक हैं अंकित। जो पहले लिवमोर डॉट इन के कस्टमर भी रह चुके हैं। अंकित गुडगांव में हीरो कंपनी में काम करते थे और उनको खाना बनाना नहीं आता था इसलिए वो हर दिन लिवमोर डॉट इन से खाना ऑर्डर करते थे। करीब चार साल नौकरी करने के बाद अंकित ने आंत्रप्रेन्योर बनने के बारे में सोचा और इस साल फरवरी में लिवमोर डॉट इन के साथ सह-संस्थापक की भूमिका में जुड़ गये। अंकित के कंपनी से जुड़ने के बाद लिवमोर डॉट इन ने आउटलेट की जगह डिलिवरी मॉडल पर जोर देना शुरू किया है। जिसके बाद ये लोग गुड़गांव के विभिन्न ऑफिस ने सब्सक्रिप्शन के आधार पर ऑर्डर लेकर खाना पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा वो कंपनी की योजनाओं और उसकी मार्केटिंग पर काम देख रहे हैं। फिलहाल इनके पास दो तरह के उत्पाद हैं पहला है भारतीय खाना और दूसरा है कॉन्टिनेंटल खाना। लिवमोर डॉट इन खाने के कई तरह के पैकेज अपने ग्राहकों को देता है। इन पैकेज में पूरे दिन का खाना भी शामिल है तो जिम की मेंबरशिप भी। इसके अलावा इनके पास न्यूट्रिशनिस्ट की एक टीम भी है। जो पैकेज के मुताबिक लोगों को सलाह देती है कि उनको क्या खाना चाहिए और कितना खाना चाहिए। फिलहाल इनके साथ करीब 20 जिम, पार्टनर के तौर पर जुड़ चुके हैं।

कंपनी के सह-संस्थापक अश्वनी का कहना है कि वो ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं कि लोग हफ्ते में सिर्फ एक दो बार ही अन्हेल्दी खाना खायें ताकि वो स्वस्थ्य रह सकें। लिवमोर डॉट इन के खाने के मेन्यू में आपको रोटी, दाल, पनीर, ब्राउन राइस इत्यादी सबकुछ मिल जाएगा। ये लोग खाने में रिफाइंड तेल का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करते और मीठे खाने में चीनी का कम से कम इस्तेमाल होता है। इनके बनाये पूरे दिन के खाने में 1600 से 1700 कैलोरी पुरूषों के लिए होती है, जबकि महिलाओं के लिए कैलोरी इससे काफी कम रखी जाती है। लिवमोर डॉट इन सुबह 6:30 बजे से काम करना शुरू करता है और रात 11 बजे तक काम करता है। इस दौरान ये चार वक्त का खाना मुहैया कराता है और हर खाने में 3 से 4 विकल्प होते हैं। इतना ही नहीं हर रोज खाने का मैन्यू भी अलग अलग होता है। ताकि लोग अपने स्वाद के मुताबिक इनके बनाये खानों का लुत्फ उठा सकें। लिवमोर डॉट इन में भारतीय नाश्ता 40 रुपये शुरू होता है, जबकि कॉन्टिनेंटल नाश्ता 80 रुपये से शुरू होता है।

लिवमोर डॉट इन के संस्थापकों के मुताबिक उनका ये कारोबार पिछले तीन महीनों के दौरान 100 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहा है। अब इनकी योजना दिल्ली एनसीआर के दूसरे इलाकों में भी पैर जमाने की है। ये लोग खाने का ऑर्डर अपनी वेबसाइट लिवमोर डॉट इन के जरिये तो लेते ही हैं इसके अलावा फोन और व्हाट्सएप के जरिये भी ये ऑर्डर लेते हैं। लिवमोर अपने ऐप पर भी काम कर रहा है जिसके जल्द ही बाजार में उतरने की उम्मीद है। ये लोग फूड पांडा और दूसरी वेबसाइट के जरिये भी खाने का ऑर्डर लेते हैं। इन लोगों की टीम में कुल 18 सदस्य हैं जिसमें 2 शैफ भी शामिल हैं जिनके पास अच्छा खासा अंतर्राष्ट्रीय खाना बनाने का अनुभव है। फिलहाल इनकी नजर निवेश के अगले चरण पर है। इससे पहले 2014 में लिवमोर में निवेश का पहला चरण पूरा हो चुका है।

लिवमोर की वेबसाइट है www.livmore.in

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